ये शब्द अपने आपको हर दिन बोले।
तुम्हे किसी को दिखाने के लिए कुछ नहीं करना
तुम्हे अपनी फ़ील्ड के उस लेवल तक जाना है
जहाँ तक कोई नहीं गया
ये शब्द अपने आपको हर दिन बोले।
हर सक़्सियत का अपना एक फ़ील्ड होता है जिसमे वो सोच पाता हैं कि मै यहाँ थोड़ा मेहनत कर दूंगा तो सायद समय से पहले सिखर तक पहुँच जाऊँगा।
बस समय वहाँ लगता है अपने आप मे वो फ़ील्ड तलाशना इसलिए ज़रुरी हैं कि सबसे पहले वो रास्ता जो तुम्हारे अन्दर ही छुपा है।
जिस रास्ते से तुम्हे मंजिल तक पहुँचना हैं उस रास्ते को ढूंढो ये बिलकुल नासमझी हैं की हमे सही रास्ता नहीं मीला तो इंतजार किये बिना गलत रास्ते को पकड़ लिया और बीच मे जाकर खाई मे गिर गया।
ये इंतजार बेहतर हैं गलत रास्ता पकड़ने से क्योकि आगे जाकर ये रास्ते पर तुम्हे गिर ही जाना हैं,रूक ही जाना है,ठहर ही जाना है,सिमित ही रह जाना है।
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