जबतक अपनी गोल के पीछे नहीं भागोगे ज़माना के पीछे भागना पड़ेगा












जिस दिन तुम क़ामयाब हुए न तुम्हारे गावँ,रिस्तेदार,दोस्त,दुशमन,शहर-शहर तक के लोग तुम्हे अपना क़रीबी रिस्तेदार जिगरी यार ,

एक से एक रिस्ता जोड़ कर बताएंगे।

और जिस दिन तुम नाक़ामयाब हुए,तुम्हारे अपने ही तुम्हे छोड़कर चले जाएंगे,शायद वो भी तुम्हे छोड़कर चला जाए जिसे तुम खुद से भी ज़्यादा प्यार करते हो,ऐतबार करते हो,ये दूनियाँ वैसे ही हो गई हैं यक़ीन करो।

नही की जा सकती किसी पर भरोसा,अगर चाहते हो कि हर किसी से रिश्ता बना रहे तो तुम्हे क़ामयाब होना पड़ेगा।

और एक बात और याद रखो,जबतक तुम अपने गोल के पीछे नही भागोगे ज़माना के पीछे भागना पड़ेगा।

भगाएगी ये दूनियाँ तुम्हे अपने पीछे और तुम्हे भागना पड़ेगा,और अंत मे तुम डिप्रेशन का शिकार हो जाओगे।

इसलिए बिन कोई चिंता किए हुए सही रास्ता तलाश करो मंजिल तलाश करो और योद्धाओं के तरह भीड़ जाओ उस मंजिल तक पहुँचने के लीए।

नही करो इस रास्ते मे किसी की परवाह जो छुट जाए तो छुट जाए चले आयेंगे ये सब वापस अगर तू एक बार क़ामयाब हो गया तो।

यकिन करो तुम्हे बुलाने की ज़रूरत भी नही पड़ेगी शर्त ये है की तू अपनी मंजिल की सिखर तक पहुँच जा।

नही तो उम्र भर तुम किसी न किसी के लिए रोते रहोगे बुलाते रहोगे न कोई तुम्हारा आँसू पोछने आएगा न साथ निभाने ।

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