अपनी_नज़र को अपने प्रति हमेशा ऊंचा रखो
तुम जितना छोटे होते हो
तुम्हारे सामने हर कोई उतना ही बड़ा दिखेगा।
गौर करो इस बात पर कभी खुद को कमजोर छोटा असहाय हक़ीर न समझो तुम तुम हो
तुम्हारा एक अलग रवैया होनी चाहिए।
कोई हमे छोटा और बड़ा नही देखता ये हमारी ही मिजाज हैं।
जिस तरीके से हम खुद को देखते हैं ये ज़माना भी हमे देखने लगता है।
जिस नज़र से हम खुद को देखते है ये दूनियाँ भी हमे उसी नज़र से देखने लगता है।
ये मौका हम ही देते है लोगो को अपने प्रति मज़ाक बनाने का फिर बाद कहते है।
की लोगो का दृष्टि ठीक नही हमारे प्रति लोग हमारा मज़ाक बनाते है कोई इज्जत नही करता सब धितकारते है हमे।
पूछता हूँ कभी अपने आप से ये पूंछे हो क्यों ऐसा हैं हमारे साथ क्यों हमारे साथ ऐसा होता है।
इसका सिर्फ और सिर्फ यही मतलब है की तुमने ही उन्हे छुट दे रखा है अपनी गरीबी मुफलिसी का रोना रो कर अपने आप को छोटा समझकर कभी-कभी तुम्हे किसी चिंज की ज़रूरत नही होती नाहि दिलचस्पी मगर लोगो के पास है तो हमारे पास भी होना चाहिए।
इस आधार पर तुम उस सक़्स से इस तारीके से पेश आते हो मानो तुम्हारे पास कुछ नही।
उस समय तुम वो सक़्स के पास खुद को इतना छोटा बना देते हो जैसे इंसान के सामने एक चींटी
और लोग इसी आधार पर तुम्हे खुद से छोटा और हीन समझने लगते है तुम्हीं ऐसा सक़्स हो जो वैसे लोग को एहसास दिलाते हो के यक़ीनन वो सक़्स बड़े हैं।
ब्लकि सच्चाई ये हैं की कोई बड़ा और छोटा नही
यहाँ इंसान की कहानी और सोच बड़ी होनी चाहिए
ना की वो आर्थिक रुप से बड़ा हो तो वो इंसान बड़ा है।और वह उसी चिंज के आधार पर तुम्हारा मज़ाक बनाते है तो तुम्हे तक़लीफ़ होती है।
मै पूछना चाहता हूँ तुम्हे ये तक़लीफ़ होती क्यों है?
अगर होती है तो तुम लोगो को अपनी हर बात कम बेसी जो तुम्हारे ज़िन्दगी मे चल रही है वो बताते क्यों हो तुम जैसे हो तुम हो कभी कोई तुम्हें आर्थिक रुप से मदद नही करने वाला और नाहि तुम चाहोगे
फिर बताओ जारा तुम्हे अपनी गरीबी का रोना लोगो के सामने रोने से तुम्हे क्या मिला?
सिर्फ तुम मानसिक रूप से बीमार के अलाव और कुछ नहीं होखोगे और अपनी इज्जत को तार तार के आलवा और कुछ नही।
इसलिए आपको चाहिए कि आप अपना एक अलग मिजाज रखे।
ना अपने आप को किसी के सामने छोटा रखने की ज़रूरत है ना औरो को बड़ा देखने कि ज़रुरत है।
तुम्हारे पास इतना समय ही नही होनी चाहिए।
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