आनंद और राहत मे अंतर करना सिखों




आपके पास मारुति हो या बीएमडब्ल्यू रोड वही रहेगी

आप ईकोनोमी लॉस मे सफर करे या बिज़नेस मे आप का वक़्त तो उतना ही कटेगा।


आप टाइटन पहने या रोलेक्स समय वही रहेगा

आप के पास एप्पल हो या सैमसंग आपको कॉल लगाने वाले लोग नही बदलेंगे।


भव्य (शानदार,आलिशान,सुन्दर, विराट)जीवन का लालसा,चाहत,इच्छा रखने या जीने मे कोई बुराई नही लेकिन सावधान रहे क्योंकि ज़रुरत पूरी हो सकती है

तृष्णा नहीं प्यास इच्छा आकांक्षा नही।

हम तबतक मजे मे नही है जबतक हम राहत और आनन्द मे अन्तर न कर सके ये कितनी बड़ी खुद से ना इंसाफी है की हमने हर कुछ हासिल कर लिए मगर चैन का एक कतरा भी न पा सके।


और उम्र भर खुद को कहते रहे की चैन सुकून तो यही था मगर तड़पते रहे सुकन और आनंद भारी ज़िन्दगी के लीए।


एक सच ये भी है की पैसा वाला का आधा पैसा तो ये जताने में जाता है कि वो भी पैसा वाला है।

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