हीरा हो तुम इस बात को जानलो
तुम खुद को मिट्टी समझ रखे हो असल मे हीरे हो तुम
क्यों नही तुम स्वीकार करते लोगो की निगाहों से न देखा करो खुद को।
मुमकिन ही नही ये की तुम औरो के नज़र मे अपनी वस्तविकता को देख सको की क्या है तुम्हारे वजुद।
ये तुम ही देख सकते हो,मगर तुम इंतज़ार मे हो की मै हीरा हूँ कोई और तो कहे।
तुमने ही दे रखा है लोगो को इतना छुट खुद को और खुद की पहचान को बताने के लिए लोगो को बोल रखा है तुमने ही।
जब तुम्हारे भी निगाहे हैं क्यों तुम्हे किसी और के आंखे पर भरोसा हैं?
क्यों तुम किसी और के निगाहे का मोहताज हो?
बिल्कुल इग्नोर करदो उन सारे लोगो को उन सारी बातें को जो तुम्हे अधूरा समझते हो।
जब भी लोगो के द्वारा तुम्हे ऐसे बाते कहीं जायें तो ये जान लो कि ये साज़िस हैं।वो तुम्हारे परफेक्शन से जलते हैं,डरते हैं ये तुम्हारे पूर्णता से।
तुम्हे सावधान हो जाना हैं सब्र (सहनशीलता)से खुद को समझाना है ये नासमझी मे फसया जा रहा तुम्हे।
उन्हे ठोकर मारो और अपने अन्दर झाँको और एक विश्वास के साथ कहो हाँ मै हीरा हूँ।
हाँ मै पुरा हूँ यकीनन तुम्हे एहसास होगा की नही ये लोग झूठ कहते है की मै धुल हूँ मिट्टी हूँ ।
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