जो लालची हैं बेशक वो गुलाम हैं।
असल गुलामी है अपनी गुलामी बात तो बहुत करते हो की हमे दुनिया-जहान की गुलामी नही करनी क्या तुमने अपनी गुलामी करना छोड़ दिया? अगर जावब है हाँ तो तुम पूरी तरह से आजाद हो अगर नहीं तो पहले खुद से आज़ादी पाओ सबसे पहले तुम खुद की गुलामी को छोड़ो। ये जमाना तुम्हे कहा गुलाम बना रखा है । ये गुलाम बनाती ही है ऐसे सक़्सियत को जो खुद का गुलाम हो। आप क्या सोचते है की आप का लालच भी बरकरार रहे और आपको गुलाम भी न होना पड़े। ऐसा हो सकता है भला याद रखो अगर आप की कोई लालच नही है और न आप को किसी से कुछ चाहिए । तो ना आप किसी से दबोगे और ना किसी से डरोगे ना किसी के गुलामी और ना किसी के हाँ मे हाँ ना किसी के ना मे ना भरोगे ये तुम्हारी लालच और तुम्हारा स्वार्थ तो है। जो तुम्हे गुलाम बना रखा है । जब आप किसी चिंज के प्रति लालच रखते हो इसका मतलब आप अपने मन का गुलाम हो। अगर आपको गुलामी छोड़नी है तो आप को खुद पर नियंत्रण,सयंम रखना होगा लालच को छोड़ना होगा। जो खुद का गुलाम नही वो दुसरे के अंडर मे रहकर भी राजा का मर्तबा पा लेता है। नोट:अपने आप को अपने बस मे रखना एक सकारत्मक सोच और सकारत्मक रवैया का जन्म देती...